विनय

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राह चलते हुए कई ऐसे लोग मिलते हैं, जिनकी बाहें उनके शरीर के रेडियस में समा नहीं पाती। टी-शर्ट की बाजुओं को कन्धों तक समेट कर, बार बार अपने डोलों को निहारते हुए, रॉयल इनफील्ड के पहले से ही दमदार एग्जॉस्ट को और भी फटफटिया बनाते हुए, लम्बी दाढ़ी  और मूंछों पर तांव देते हुए, कई लोग मिल ही जाते हैं।

हमारा विनय इन सब से थोड़ा अलग है। वो अपने डोलों को नहीं निहारता क्योंकि उसके पास है ही नहीं। वो राह चलते लोगों की तरफ देख कर मुस्कुरा देता है। मूछों पर तांव नहीं देता वो, क्योंकि मूंछ थोड़ी कम ही आती है। विनय अपने नाम के अनुरूप, अवांछित पंगे लेने से बचता है।
अपनी एक्टिवा पर मद्धम मद्धम गीत गुनगुनाते हुए ऑफिस जा रहा है विनय। बगल से फट-फट करती रॉयल इनफील्ड पर एक पहलवान-नुमा व्यक्ति निकलता है। विनय का इस ओर ध्यान ही नहीं गया। वो बस मज़े से अपनी एक्टिवा चला रहा है। अगले मोड पर इनफील्ड वाले भैया ज़ोर से दायीं ओर मुड़ने के लिए हैंडल घुमाते हैं पर पीछे से आ रही विनय की एक्टिवा उनका रास्ता रोक लेती है।
“अँधा है?” पहलवान भैया ने कहा।
“नहीं। आँखें तो ठीक है। तभी तो ब्रेक लगा लिया।” विनय ने मज़ाकिया लहज़े में कहा।
पहलवान आँखें दिखाकर निकल जाता है। विनय एक बार फिर गाने पर फोकस करता है।
ऑफिस में पहुँच कर भी विनय अपने खुशनुमा माहौल को बनाये रखता है। थोड़ी देर बाद वह नीचे कॉफ़ी शॉप में जाकर कॉफ़ी आर्डर करता है और एक खाली टेबल की तरफ बढ़ता है। जैसे ही वो कुर्सी पर बैठने वाला होता है, एक लड़का और लड़की उसी टेबल पर आकर बैठ जाते हैं। विनय उस लड़के की तरफ देखता है।
“कोई दिक्कत?” पहलवान भैया पूछते हैं। ज़ाहिर है कि उन्हें अपने डोले पर कुछ ज़्यादा ही भरोसा है।
“नहीं, कोई दिक्कत नहीं। मैं कहीं और बैठ जाऊंगा।” विनय ने कहा।
लड़का और लड़की आपस में कुछ खुसफुसाये और विनय की तरफ देखकर हंसने लगे। विनय उनकी तरफ देखकर मुस्कुरा दिया।
वो ऑफिस के बाद वापस घर आया। अपनी एक्टिवा घर के बाहर खड़ी की।
जैसे ही वह घर के अंदर आने लगा, पड़ोस के गुप्ता जी का लड़का विनय को रोक कर बोला,”भैया, पापा ने कहा है कि आप अपनी स्कूटी घर के अंदर लगा लीजिये। हमारी कार मोड़ने में दिक्कत होती है।”
विनय ने गुप्ता जी के लड़के के बालों में हाथ फिराया। चुपचाप अपनी एक्टिवा घर के अंदर खड़ी करके दरवाज़ा बंद कर लिया।
दिन ख़त्म हो गया था। बिस्तर सोने के लिए तैयार था। विनय बिस्तर पर लेटा और एक हाथ अपने माथे पर रख लिया और आँखें बंद कर ली।
थप्पड़….. लात…… मुक्का….  धाड़ धाड़ धाड़ धाड़…… 
विनय ने आखें खोली। एक लम्बी सांस ली और फिर आँखें बंद की।
इनफील्ड वाला पहलवान उसके सामने से बाइक मोड़ रहा है। विनय ने सही वक्त पर ब्रेक लगाया। इससे पहले कि पहलवान कुछ बोलता…… 
 
“हरामखोर …! ” विनय ने गाली देते हुए पहलवान के मुंह पर थप्पड़ रसीद दिए। इससे पहले पहलवान कुछ समझ पाता, विनय ने उसकी बाइक पर लात मारी और संतुलन बिगड़ने की वजह से पहलवान गिर गया। विनय ने जूते की नोक से उसके मुंह पर 3-4 बार मारा। फिर बाइक का पीछे देखने वाला शीशा घूमाना शुरू किया। थोड़ी देर में बाइक का शीशा अपने स्टैंड समेत हैंडल से अलग हो गया। 
 
विनय ने ठुड्डी से पहलवान को पकड़ा और कहा,”इन आँखों का काम ही क्या, जब बिना देखे बाइक चलानी है।” 
 
इतना कहकर वह शीशे का स्टैंड पहलवान की आँख में घुसा देता है। 
विनय अपनी आँखे खोलता है। करवट बदल कर बगल वाला तकिया अपनी बाहों में समेत लेता है। और एक बार फिर आँखें बंद करता है।
जैसे ही कॉफी शॉप में लड़का और लड़की उसी के टेबल पर बैठने की कोशिश करते हैं , विनय कुर्सी खींच देता है। जैसे ही लड़का उठ कर मारने के लिए बढ़ता है, विनय उसकी टांगों के बीच लात मारकर उसे फिर गिरा देता है। टेबल पर पड़ा फूलदान उठाता है और उसके सिर पर दे मारता है। 
फिर लड़की की तरफ मुड़ कर मुस्कुराते हुए कहता है,”दीदी, बैठिये न। कॉफ़ी नहीं पिएंगे?”
 
और वह खोलती हुई कॉफ़ी अधमरे पहलवान के मुंह पर उड़ेल देता है। 
 
विनय बिस्तर से उठ खड़ा होता है। मटके से एक गिलास पानी भरता है और एक ही घूँट में पी जाता है। फिर वापस आकर बिस्तर पर लेट जाता है और आँखें बंद कर लेता है।
विनय गली के बीचोंबीच अपनी एक्टिवा खड़ी किये हुए है। गुप्ता जी अपनी गाड़ी लेकर आते हैं और विनय को खड़ा देख कर उसे हटने का इशारा करते हैं। विनय नहीं हटता।  गुप्ता जी गाड़ी से उतरते हैं। जैसे ही वो गाड़ी से उतरे, विनय ने पास पड़ी ईंट उठायी और गाडी का सामने वाला शीशा फोड़ दिया। 
 
फिर जेब से एक सुआ निकाला, और एक एक कर सारे टायर पिचका दिए। फिर गुप्ता जी की गर्दन पकड़ कर बोनट पर लिटा दिया और कहा ,”गली तेरे बाप की है क्या बे?”
सुबह 6 बजे उसकी अलार्म बजती है। वह आराम से बिस्तर से उठता है और अंगड़ाई लेता है। फिर सामने वाली दीवार के सामने जाकर रुक जाता है और अपने हाथ जोड़ लेता है। दीवार पर उसके माँ बाप की तस्वीर टंगी है। 2 साल पहले विनय के माँ-बाप एक्टिवा पर बैठ कर बाजार गए थे। रास्ते में तेज़ी से आती हुई एक होंडा सिटी ने उन्हें उड़ा दिया। बाद में ड्राइवर ने पुलिस के सामने बयान दिया कि वह रास्ते में किसी से लड़ कर आया था। गुस्से में उसे याद ही नहीं रहा कि कब उसकी गाडी स्पीड लिमिट से कहीं आगे निकल चुकी है।
तभी से हर रात विनय सिर्फ सपनों में लोगों पर अपना गुस्सा निकालता है। वह नहीं चाहता कि असल ज़िन्दगी में वह अपना आपा खो दे और उसी तरह किसी के अपनों को उनसे छीन ले जैसे उस होंडा सिटी के ड्राइवर ने विनय से छीना था।
विनय खिड़की खोलता है तो देखता है कि गुप्ता जी का लड़का छत पर घूम रहा है। विनय की तरफ देख कर वह मुस्कुरा कर हाथ हिलाता है और कुछ बोलता है।
विनय उसके हाव भाव को समझ जाता है और उसके गुड मॉर्निंग का जवाब मुस्कुरा कर देता है।
सुबह की शान्ति और रात के तूफ़ान के बीच, विनय का हर दिन इसी तरह बीतता है।

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