आस

EDITOR: Aditya Prakash Singh

ख़्वाहिश है दिल की
जब चेहरा दिखेगा
खिलखिलाती हँसी
कानों से होकर
शहद सी लगेगी
जब होगा ये सबकुछ
कुछ अच्छा लगेगा
जब हम मिलेंगे
जब तुम दिखोगी।

तपिश के वो लम्हे
आँखो का फेरा
आफ़त कदमों की
सफ़र ही सफ़र
तेरी नामौज़ूदगी
बस, ‘था’ एक अंधेरा
सब, बस रह जाएँगे
जब तुम दिखोगी।

अंजान होगी
वो जब दिखेगा
कँपकपी उसकी
अलग सी रहेगी
हो आस पूरी
एक दिन आएगा
जब हम मिलेंगें,
जब तुम दिखोगी।

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