Stranger

EDITOR: Aditya Prakash Singh

Who doesn’t like to be an object of affection, being told how much they are liked and valued, being put up on a pedestal, who doesn’t?

About Last Winter

The Editing Startup

And this is also when I stopped fearing Death, for Death, I realized, is a kind gentleman, just as Emily Dickinson had once written. Worldly, bodily pain, that is ruthless, not Death.

हार से प्यार

EDITOR: Aditya Prakash Singh

मैं भी रेस का घोडा था। चाबुक पड़ने पर बहुत तेज़ दौड़ता था। दांव लगते थे मुझ पर। फिर एक दिन, भागते भागते साँस फ़ूलने लगी। पैर जवाब दे गए। मैं वहीँ बैठ गया। रेस पूरी ही नहीं की। सब लोग जीतने वाले घोड़े की पीठ थपथपा रहे थे। और मैं हांफता हुआ, नम होती आँखों से उसे देख रहा था। नहीं, उस घोड़े को नहीं। अपनी हार को।

फ्यूज़ लड़ी


“कहाँ से करेगा रौशनी? ये बल्ब लगा है न। वो तो मेहेरबानी हो शमशेर भाईसाहब की जो बिजली का जुगाड़ कर दिया। एक तार हमें भी दे दी। तू खाना खा। और सुन, कल कुर्ता पजामा पहन लेना और कबाड़ उठाने मत जाना। यहीं रह कर, सबके साथ खेलना। रात को खील और पतासों से पूजा करके थोड़े बहुत पठाके जला लेना। शमशेर भाईसाहब लाएं हैं सब बच्चों के लिए।”