तू सच है

EDITOR: Gyan Akarsh

मैंने खुद की एक कहानी लिखी है
जिसमे तेरा भी एक हिस्सा है
नहीं जानता मैंने तुझे ढूंडा है
या लिखा है
तू सच है
या मेरी एक रचना है?

तेरे इर्दगिर्द घूमती मेरी कहानी
तुझसे मुझे कुछ जोड़ती सी है
मेरा ज़िक्र तुझमें करती सी है
मेरा साया दिखता है तुझमें
तू सच है
या आईना है?

तेरी बातें मुझसे आती हैं
जैसे तूने मुझे पढ़ा है
ये बातें मेरी हैं
या तेरी हैं
तू सच है
या मैंने तुझे गढ़ा है?

तेरी मंज़िल मुझे दिखती है
तेरा सफ़र मुझतक आता है
तेरे रास्ते तूने चुने हैं
या मैंने तुझे दिए हैं
तू सच है
या मेरी वही ख़्वाहिश है?

तेरी अदा में मेरी हरक़त है
तेरी साँसों में मेरी हरारत है
मेरी आहट पे तेरी निगाह भी है
तू मुझसे इतनी जो जुड़ी सी है
तू सच है
या मेरा वोह सपना है?

मैं पहले तुझसे मिला हूँ
तेरी तस्वीर याद है
तेरी आँखों से शुरू हुई
ये बात आज यहां है
मैं जानता हूँ
तू सच है
लेकिन तेरा सच मेरा नहीं
ये कहानी तो मेरी है
लेकिन मेरा किरदार मेरा नहीं।

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